ठाकुर भी सठिया गया है

ठाकुर ने एक दिन रामू को आवाज लगाई

ठाकुर – रामू पौधों में कौन डालेगा। जा डब्बा उठा और पानी डाल

रामू – मालिक बहार बारिश हो रही है।

ठाकुर – मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए रामू……. छतरी ले कर जा

रामू – (मन में) इस पागल को कौन समझाए

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