कानपुर में दूल्हा-दुल्हन लेंगे आठ फेरे, जानें क्या है आठवे फेरे की महत्वता

हिन्दू विवाह दुनिया में अपने धार्मिक रीति रिवाजों के लिए जाना जाता है, शादी में होने वाले रीति रिवाज शादी की महत्वता और पवित्रता को दर्शाते हैं जिस से इस रिश्ते को अटूट बनाया जा सके।
हर शहर और राज्य के अपने अलग-अलग रिवाज होते हैं, जैसा की हम सभी jaante हैं की हिंदू विवाह में 7 फेरे ही होते हैं और हर फेरे का अपना अर्थ और महत्त्व होता है, जो पंडित साथ-साथ में बताते चलते हैं, ये एक तरह से कसमें होती हैं जिसका पति-पत्नी आजीवन पालन करना होता है।
लेकिन कानपुर में अब दूल्हा-दुल्हन 7 की जगह 8 फेरे लेंगे, अब आप सोच रहे होंगे कि भला इसके पीछे क्या वजह है, इसके पीछे की वजह जान आप भी इस वजह का सम्मान करेंगे।

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कानपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रीय स्वर्णकार महासभा के अध्यक्ष जय कुमार वर्मा ने बताया कि 14 मई को कानपूर के सरसैया घाट पर होने वाले सामूहिक विवाह में सभी जोड़े आठ फेरे लेंगे, यह आठवां फेरा इस वचन के साथ लिया जाएगा कि कोई भी जोड़ा न कभी भ्रूण के लिंग की जांच करवाएगा और न ही कन्या भ्रूण हत्या करवाएगा।

यदि ऐसी सोच सभी लोगों की हो जाय और इस वचन का पालन किया जाय तो समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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