धार्मिक एकता की मिसाल है ये धार्मिक स्थल, जहां दरगाह और शिव मंदिर हैं साथ-साथ

आज के वक्त में जहाँ लोग मजहब के नाम पर एक दुसरे का गाला काटने को तैयार हैं वहीँ दूसरी तरफ अजमेर दे रहा है सांप्रदायिक एकता की मिसाल जहां दरगाह और शिव मंदिर साथ-साथ हैं।
एक ऐसी जगह भी है, जहां न कोई मुसलमान होता है और ना ही कोई हिन्दू, हम बात कर रहे हैं अजमेर के बाबा बादाम शाह की, अरावली की पहाड़ियों में ये अद्भुत जगह है, जहां मुसलमान शिव मंदिर में पूजा करते दिख जायेंगे और सिख दरगाह पर मत्था टेकते हुए।

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धार्मिक सद्भावना और एकता की मिसाल बनी ये जगह अपने आप में अद्भुत है, यहाँ मंदिर और मस्जिद एक ही जगह हैं , और यहां धर्म की दीवार लोगों के मन से भी नदारद हो जाती है, जन्म से मुसलमान रहे बाबा बादाम शाह ने यहां खुद शिवलिंग की स्थापना की थी, 1965 में इसी जगह उन्होंने समाधी ली थी, तब से ही यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं।

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बाबा बादाम शाह 1921 में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास स्थित गांव से अजमेर आये थे. ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह में एक साल बिताने के बाद उन्हें लगा कि आत्मा की शांति पाने का यही तरीका है, संत का जीवन अपनाने से पहले वो एक सरकारी कर्मचारी थे. उनकी बहन ने उनके सूफ़ी संत बनने के फ़ैसले का समर्थन किया था, बाबा ने मन की शांति पाने के लिए ये जीवन चुना और आज हज़ारों लोग मन की शांति पाने के लिए इस जगह आते हैं।

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