धातु के पन्नों से बनी किताब में मिले जीसस के 2000 साल पुराने दुर्लभ पोर्ट्रेट्स

समय-समय पर धरती से किसी न किसी रूप में इतिहास के कई अनोखे रहस्य सामने आते रहे हैं, जिनका किसी सभ्यता, विज्ञानं या धर्म से नाता होता है, इन सबसे इतिहास की कई नयी जानकारियां प्राप्त हुई हैं, जॉर्डन में भी साल 2008 में एक ऐसी ही पुरात्तात्विक महत्त्व वाली वस्तु मिली, जिसने दुनिया के सबसे बड़े धर्म के अनुयायियों में जिज्ञासा का माहौल बना दिया है।

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यहाँ एक ऐसी ऐतिहासिक पुरातन किताब मिली है जिसमें जीसस के सबसे प्राचीन पोर्ट्रेट मिले हैं, जानकारों ने इन्हें कम से कम 2,000 साल पुराना बताया है।

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इस किताब में लगे धातु के पन्ने एक रिंग बाइंडर द्वारा बंधे हुए हैं. जिन्हें एक्सपर्टस क्राइस्ट और उनके अनुयायियों से जोड़ कर देख रहे हैं।

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इन धातु के पन्नों पर लिखे शब्दों और चिन्हों का जानकारों ने सरल भाषा में अनुवाद किया है. यह सामग्री जीसस के बारे में काफ़ी जानकारी उपलब्ध कराती है. उनके अनुसार यह पुस्तक केवल ईसाईयों के लिए ही नहीं, बल्कि अब्राहम में श्रद्धा रखने वाले सभी Jews और Muslim धर्म के अनुयायिओं के लिए भी ख़ास है।

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इसमें यह भी समाहित है कि क्राइस्ट अपना कोई अलग धर्म नहीं बनाना चाहते थे, वो तो बस सालों पुराने King David के नियमों के समय की परम्पराओं को पुनर्जीवित कर रहे थे. उनके द्वारा पुरुष और नारी दोनों रूपों में ईश्वर की पूजा की जाती थी।

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कुछ स्कोलर्स इस पुस्तक के ऊपर इसके फेक होने का भी आरोप लगा रहे हैं,
क्राइस्ट को लेकर जब भी कोई नई बात सामने आती है, तो हमेशा से ही उसके साथ कोई न कोई कॉन्ट्रोवर्सी ज़रुर जुड़ जाती है. फ़िलहाल तो जानकार इन पोर्ट्रेट्स को जीसस के सबसे प्राचीन पोर्ट्रेट्स के रूप में देख रहे हैं।

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