15 ऐसी फिल्में जिन्हें सेंसर बोर्ड ने नहीं होने दिया रिलीज़ ये फ़िल्में आज तक नहीं आ सकी परदे पर

बॉलीवुड यानी की हमारे हिंदी सिनेमा का जगत। पर इस जगत के ऊपर भी एक कर्ता धर्ता बैठा है जिसे हम सब लोग सेंसर बोर्ड के नाम से जानते हैं। आये दिन और हर साल ना जाने कितनी फ़िल्में बनती हैं और ना जाने कितनी रिलीज़ होती हैं। जो फ़िल्में बड़े स्टार्स और महँगे कलाकार करते हैं वो तो खूब शोहरत कमा लेती हैं पर इन सब फिल्मों के बीच में कुछ ऐसी फ़िल्में भी आती हैं जिन्हें हमारे बॉलीवुड की कैंची यानी की सेंसर बोर्ड परदे पर नही आने देता।

यहाँ पर हम आप को ऐसी ही पंद्रह फिल्मों की कहानी बताने वाले हैं जिन्हें या किसी ना किसी खास वजह के कारण रिलीज़ नहीं होने दिया गया।

फिल्म का नाम: बैंडिट क्वीन (Bandit Queen-1994)

बैंडिट क्वीन फिल्म में कुछ ज्यादा ही आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था और भारतीय सेंसर बोर्ड ने इस पर पाबन्दी लगा दी। इस फिल्म की कहानी फूलन देवी के जीवन पर आधारित है, और इस फिल्म को शेखर कपूर ने बनाया था। फिल्म में सेक्सुअल कंटेंट, नग्नता और अपमानजनक भाषा है, जो सेंसर बोर्ड नहीं पचा सका और इसी कारण से इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

1-Bandit Queen

फिल्म का नाम: फायर (Fire – 1996)

दीपा मेहता का काम अपने ग्लोबल कंटेंट और अपील के लिए लोकप्रिय है। लेकिन उन की इस फिल्म पर काफी विवाद खड़ा हुआ और सेंसर बोर्ड को इसे मजबूरन परदे पर आने से रोकना पड़ा। इस फिल्म में दो बहनों का ससुराल में समलैंगिक संबंध दिखाया गया है। इस की कहानी में दिखाए गए पहलू हिंदू समूहों जैसे शिवसेना को पसंद नहीं आये और सब विरोध पर उतर आये। इस फिल्म को बनाने के बाद इस के कलाकार शबाना आजमी और नंदिता दास तथा निर्देशक दीपा मेहता को जान से मारने की धमकी मिलने लगी और सेंसर बोर्ड ने अंत में इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया।

2.fire

फिल्म का नाम: कामसूत्र – ए टेल ऑफ लव (Kama Sutra – A Tale Of Love 1996)

इस कड़ी में तीसरी फिल्म है कामसूत्र – प्यार की एक कहानी जो सेंसर बोर्ड के प्रकोप से न बच पाई। इस फिल्म को स्पष्ट’ रूप से अनैतिक करार दिया गया। इस फिल्म को मीरा नायर ने बनाया था। इस की कहानी भारत में 16 वीं सदी के चार प्रेमियों के जीवन का चित्रण करती है। यह आलोचकों के साथ एक हिट फिल्म लेकिन सेंसर बोर्ड के साथ असफल फिल्म रही और अंत में प्रतिबंध लगा दिया गया।

3.kamasutra

फिल्म का नाम: उर्फ़ प्रोफेसर (Urf Professor 2000)

सेंसर बोर्ड को पंकज आडवाणी की उर्फ़ प्रोफेसर फिल्म भी कुछ जमी नहीं। इस फिल्म में मुख़्य किरदार मनोज पाहवा, अंतरा माली और शरमन जोशी ने निभाया था। फिल्म की कहानी कार के हिट एंड रन केस के इर्द-गिर्द घूमती है जिस बीच लॉटरी टिकट गायब हो जाता है। सेंसर बोर्ड इस के अभद्र दृश्यों और बोल्ड भाषा से न खुश हुई जिस के चलते इसे भी प्रतिबंधित कर दिया गया। यह फिल्म एक ब्लैक कॉमेडी है।

4.urf

फिल्म का नाम: द पिंक मिरर (The Pink Mirror 2003)

प्रयोगात्मक फिल्मों के दौर में इस फिल्म में इस्तेमाल किया गया विषय भावुक था। पिंक मिरर श्रीधर रंगायन की एक ऐसी फिल्म है जो ट्रांस-सेक्सुअलिटी की अवधारणा को दिखती है। कहानी दो ट्रांससेक्सुअल और एक समलैंगिक किशोरी की है जो एक आदमी के साथ सम्बन्ध बनाने का प्रयास करते हैं। सेंसर बोर्ड इस फिल्म की अश्लीलता से नाराज हो गया और इसे प्रतिबंधित कर दिया। हालाँकि इस फिल्म को दुनिया भर के फिल्म समारोहों में काफी अच्छी प्रतिक्रिया और समीक्षाएं मिली तथा इसे कई पुरुस्कारों से नवाजा गया। लेकिन हमारे सेंसर बोर्ड की जीर्ण मानसिकता के आगे इसे परदे पर आने से पहले ही हटा दिया गया।

5.the-pink

फिल्म का नाम: पांच (Paanch 2003)

यहाँ हम आते हैं अब हमारे देश के सब से बड़े सेंसर बोर्ड के सब से बड़े दुश्मन अनुराग कश्यप की फिल्मों की ओर। पाँच एक अनुराग कश्यप की फिल्म है जिसे सेंसर बोर्ड ने परदे पर आने से रोक दिया था। इस फिल्म की कहानी 1997 में हुई जोशी अभ्यंकर द्वारा की गई सीरियल हत्याओं पर आधारित है। फिल्म के उच्च ऑक्टेन हिंसा, अभद्र भाषा और मादक पदार्थों जैसे ड्रग्स, शराब के सेवन को परदे पर दिखाने के लिए सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज नहीं होने दिया हालाँकि यह फिल्म एक थ्रिलर कहानी को दर्शाती है। अनुराग कश्यप से सेंसर बोर्ड का छत्तीस का आंकड़ा काफी पुराना है और यही एक सब से बड़ा कारन भी है की मार्किट में फिल्म के रिलीज़ से पहले ही उन को चुरा लिया जाता है।

6.paanch

फिल्म का नाम: ब्लैक फ्राइडे (Black Friday 2004)

यह फिल्म भी और किसी ने नहीं बल्कि हमारे एक मात्र बॉलीवुड निर्माता अनुराग कश्यप ने बनाई है। इस फिल्म के कहानी एस हुसैन जैदी की प्रसिद्ध किताब “ब्लैक फ्राइडे – बंबई बम विस्फोटों की सच्ची कहानी” के आधार पर बनाया गया है। अनुराग कश्यप की फिल्म तो आने से पहले ही अँधेरे में चली जाती है। इस फिल्म पर बंबई उच्च न्यायालय ने स्टे-ऑर्डर (रोक का आदेश) लगा दिया था क्योंकि इस में सन 1993 में हुए मुंबई विस्फोट के कई ऐसे पहलुओं को दिखाया गया था जिस से जनता काफी उग्र हो सकती थी। इस फिल्म में दिखाया गया है की किस तरह सरकार की नाकामी से सभी गुनाहगार रिहा हो गए।

7.black

फिल्म का नाम: परज़ानिया (Parzania 2005)

परज़ानिया फिल्म गुजरात के अतीत के जख्म और घावों को दर्शाता है। इस फिल्म को बराबर प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। इस की आलोचना भी हुई और प्रशंसा भी की गई। कहानी में दर्शाया गया है कि एक लड़का जिस का नाम अजहर था वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में कहीं गायब हो जाता है। पूरी फिल्म अजहर के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आती है। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज गया। भारत में खाली अच्छी कहानी के बल पर कोई भी फिल्म परदे पर नहीं आ सकती है ये तो हम सब जानते हैं। फिल्म के बनने के बाद इसे कई राजनीतिक दलों की आलोचना और धमकियों का सामना करना पड़ा जिस के कारण इसे स्क्रीन पर आने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

8.parzania

फिल्म का नाम: साइनस (Sins 2005)

साइनस की कहानी एक केरल राज्य के पादरी (चर्च का पुजारी) पर दर्शाई गई है जो एक महिला से आकर्षित हो जाता है और उस के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना लेता है। इस फिल्म को काफी कामुक बनाया गया है जिस में पादरी को जुनून, वासना और समाज के मानदंडों का पालन करते हुए संघर्ष से भरा दिखाया गया है। इस फिल्म को कैथोलिक समाज ने नापसंद कर दिया और काफी उग्र हो गए। उनके अनुसार यह फिल्म रोमन कैथोलिक ईसाई पर अनैतिक प्रकाश दर्शा रही है। सेंसर बोर्ड ने इस में दर्शाये गए नग्न दृस्यों के कारण परदे पर आने से रोक दिया।

9.sins

फिल्म का नाम: वाटर (Water 2005)

वाटर भी एक दीपा मेहता की फिल्म है। यह फिल्म एक भारतीय विधवा महिला के जीवन पर आधारित है और उस के जीवन के अँधेरे को दर्शाती है। इस फिल्म को भी काफी विवाद का सामना करना पड़ा। इस को वाराणसी में एक आश्रम के सेट पर बनाया गया। इस फिल्म की की कहानी और किसी ने नहीं बल्कि हमारे एक ही व्यक्ति ने लिखी है। जी हाँ आप सही सोच रहे हैं अनुराग कश्यप। इस फिल्म में एक विधवा महिला के साथ हो रहे समाज के बर्ताव को दिखाया गया और काफी मार्मिक पहलुओं पर ऊँगली उठाई गई है। इस की कहानी को भारतीय सेंसर बोर्ड ने प्रतिबंधित कर दिया। फिल्म के कारण इतना आक्रोश भड़क उठा की व्यापक रूप से सड़कों पर प्रदर्शन होने लगे। यहाँ तक की प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के सेट को तोड़ डाला और आग लगा दी। इस भारी प्रदर्शन और सेट को तोड़ने में लगभग वाराणसी के 2000 प्रदर्शनारियों ने हिस्सा लिया।

10.water

फिल्म का नाम: फिराक (Firaaq 2008)

इस फिल्म की कहानी भी गुजरात दंगो के ऊपर दिखाई गई है। फिराक कथित तौर पर सच्ची घटनाओं पर आधारित है जो की दंगा-ग्रस्त गुजरात में हुआ। नंदिता दास को व्यापक रूप से हिंदू और मुसलमान समाज का आक्रोश झेलना पड़ा और अंत में इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस फिल्म पर सामाजिक भावनाओं को आहत करने के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। काफी जदोजहद के बाद आखिर इस फिल्म ने भी रिलीज़ की तारिख देख ही ली और समीक्षकों के बीच यह फिल्म चर्चा का एक विषय बन गई।

11.firaaq

फिल्म का नाम: Gan*u (2010)

अगर आप फिल्म के नाम गां*** पर जा रहे हैं तो ये आप को काफी निराश कर सकती है। यह एक बंगाली फिल्म है और इस फिल्म के कहानी रैप संगीत पर आधारित है। इस फिल्म में काफी अभद्र दृश्यों और नग्नता को दर्शाया गया जिस के कारन यह फिल्म भी काफी चर्चा में रही। ब्लैक एंड वाइट प्रारूप में बनाई गई यह फिल्म प्रतिबंधित कर दी गई क्योंकि इस में भारतीय समाज की संवेदनाओं को काफी आहत किया गया था।

12.gan

फिल्म का नाम: इंशाल्लाह, फुटबॉल (2010)

इंशाल्लाह, फुटबॉल एक कश्मीरी लड़के के ऊपर दर्शाई गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म है जो की एक दिन विदेश जाकर फुटबॉल खेलना चाहता है और अपना सपना पूरा करना चाहता है। फिल्म में दिखाया गया है की किस तरह उस के पिता को कश्मीर में आतंकवादियों के अत्याचार का सामना करना पड़ता है और वह कश्मीर से बाहर नहीं निकल पाता। इस फिल्म में उग्रवाद और कश्मीर घाटी में आतंकवाद की समस्या को बखूबी दर्शाया गया है। लेकिन इस फिल्म को बनाने का मकसद विफल हो गया और अधिक हिंसा और मार्मिक दृश्यों के चलते इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने प्रतिबंधित कर दिया।

13.inshahallahfoodball

फिल्म का नाम: डजड इन दून (Dazed in Doon 2010)

दून स्कूल भारत का एक प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है। इस फिल्म की कहानी एक छात्र पर आधारित है और उस का जीवन किस तरह से बदलाव लेता है। इस फिल्म को रत्ना पाठक शाह ने बनाया है। दून स्कूल प्रशासन को यह फिल्म कुछ ख़ास मनोरंजक नहीं लगी और इस में उन्हें स्कूल की प्रतिष्ठा का अपमान नजर आया। स्कूल प्रशासन ने सेंसर बोर्ड से इस की शिकायत कर इसे प्रतिबंधित करवा दिया।

14.doon

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